Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.40: जो मनुष्य एक हजार युग तक एक पैर पर खड़ा होकर तपस्या करता है और जो एक मास तक गंगा के तट पर निवास करता है, वे दोनों समान हो सकते हैं, अथवा यह भी संभव है कि वे समान न हों ॥40॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तिष्ठेद् युगसहस्रं तु पदेनैकेन य: पुमान्।
मासमेकं तु गङ्गायां समौ स्यातां न वा समौ॥ ४०॥
अनुवाद
जो मनुष्य एक हजार युग तक एक पैर पर खड़ा होकर तपस्या करता है और जो एक मास तक गंगा के तट पर निवास करता है, वे दोनों समान हो सकते हैं, अथवा यह भी संभव है कि वे समान न हों ॥40॥
The man who performs tapasya standing on one leg for a thousand yugas and the one who resides on the banks of the Ganges for a month may be equal, or it is also possible that they may not be equal. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥