श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.28.32 
यावदस्थि मनुष्यस्य गङ्गातोयेषु तिष्ठति।
तावद्वर्षसहस्राणि स्वर्गलोके महीयते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जितने समय तक मनुष्य की अस्थि गंगाजल में रहती है, उतने ही हजार वर्षों तक वह स्वर्ग में रहता है ॥ 32॥
 
For as long as a human bone remains in the water of the Ganga, he remains in heaven for that many thousand years. ॥ 32॥
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