श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.28.25 
शिलवृत्तिरुवाच
के देशा: के जनपदा: केऽऽश्रमा: के च पर्वता:।
प्रकृष्टा: पुण्यत: काश्च ज्ञेया नद्यस्तदुच्यताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
शीलवात्री ब्राह्मण ने पूछा - ब्रह्मन्! कौन-से देश, कौन-से जनपद, कौन-से आश्रम, कौन-से पर्वत और कौन-सी नदियाँ पुण्य की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती हैं? कृपा करके मुझे यह बताइए॥ 25॥
 
The Brahmin with a shilvaatri asked - Brahman! Which countries, which districts, which ashrams, which mountains and which rivers are considered the best from the viewpoint of virtue? Kindly tell me this.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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