श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.28.18 
युधिष्ठिर उवाच
के देशा: के जनपदा आश्रमा: के च पर्वता:।
प्रकृष्टा: पुण्यत: काश्च ज्ञेया नद्य: पितामह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "पितामह! कौन-से देश, कौन-से क्षेत्र, कौन-से आश्रम, कौन-से पर्वत और कौन-सी नदियाँ पुण्य की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी गई हैं?"
 
Yudhishthira said, "Grandfather! Which countries, which regions, which hermitages, which mountains and which rivers are considered the best from the viewpoint of virtue?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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