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श्लोक 13.28.16  |
महाभाग्यं परं तेषामृषीणामनुचिन्त्य ते।
पाण्डवा: सह भीष्मेण कथाश्चक्रुस्तदाश्रया:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| उन महान् ऋषियों के महान सौभाग्य का विचार करते हुए पाण्डव भीष्म से उनके विषय में बातें करने लगे। |
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| Thinking about the great fortune of those great sages, the Pandavas began to talk to Bhishma about them. |
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