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mahabharat 13.28.14-15h: जैसे वेद मन्त्रों के ज्ञाता ब्राह्मण उगते हुए सूर्य की पूजा करते हैं, उसी प्रकार सभी प्रसन्नचित्त पाण्डव कौरवों में श्रेष्ठ गंगानन्दन भीष्म को प्रणाम करने लगे। 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  13.28.14-15h 
प्रसन्नमनस: सर्वे गाङ्गेयं कुरुसत्तमम्॥ १४॥
उपतस्थुर्यथोद्यन्तमादित्यं मन्त्रकोविदा:।
 
 
अनुवाद
जैसे वेद मन्त्रों के ज्ञाता ब्राह्मण उगते हुए सूर्य की पूजा करते हैं, उसी प्रकार सभी प्रसन्नचित्त पाण्डव कौरवों में श्रेष्ठ गंगानन्दन भीष्म को प्रणाम करने लगे। 14 1/2॥
 
Just as the brahmins who are knowledgeable about the Veda mantras worship the rising sun, in the same way, all the happy Pandavas started paying obeisance to Ganga Nandan Bhishma, the best of the Kurus. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)