| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन » श्लोक 12-13h |
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| | | | श्लोक 13.28.12-13h  | ततस्ते भीष्ममामन्त्र्य पाण्डवांश्च महर्षय:॥ १२॥
अन्तर्धानं गता: सर्वे सर्वेषामेव पश्यताम्। | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात महर्षि भीष्मजी तथा पाण्डवों की अनुमति लेकर वे सबके देखते-देखते वहाँ से अन्तर्धान हो गए। 12 1/2॥ | | | | Thereafter, with the permission of Maharishi Bhishmaji and Pandavas, he disappeared from there in front of everyone. 12 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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