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श्लोक 13.28.106  |
इतिहासमिमं पुण्यं शृणुयाद् य: पठेत वा।
गङ्गाया: स्तवसंयुक्तं स मुच्येत् सर्वकिल्बिषै:॥ १०६॥ |
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| अनुवाद |
| जो कोई गंगाजी की स्तुति से परिपूर्ण इस पवित्र इतिहास को सुनेगा या सुनाएगा, वह सब पापों से मुक्त हो जाएगा ॥106॥ |
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| Whoever listens or recites this sacred history full of praises of Ganga will be freed from all sins. 106॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि गङ्गामाहात्म्यकथने षड्विंशोऽध्याय:॥ २६॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें गंगाजीके माहात्म्यका वर्णनविषयक छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २६ ॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १०७ श्लोक हैं) |
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