Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.101: परम प्रभावशाली भागीरथी आपकी और मेरी बुद्धि को सदैव धर्मानुसार गुणों से परिपूर्ण करें। श्री गंगाजी अपने भक्तों से अत्यंत स्नेह करती हैं। वे इस लोक में अपने भक्तों को सुखी बनाती हैं। ॥101॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तव मम च गुणैर्महानुभावा
जुषतु मतिं सततं स्वधर्मयुक्तै:।
अभिमतजनवत्सला हि गङ्गा
जगति युनक्ति सुखैश्च भक्तिमन्तम्॥ १०१॥
अनुवाद
परम प्रभावशाली भागीरथी आपकी और मेरी बुद्धि को सदैव धर्मानुसार गुणों से परिपूर्ण करें। श्री गंगाजी अपने भक्तों से अत्यंत स्नेह करती हैं। वे इस लोक में अपने भक्तों को सुखी बनाती हैं। ॥101॥
May the highly influential Bhagirathi always fill your and my intellect with virtues in accordance with our religion. Shri Gangaji is very fond of her devotees. She makes her devotees happy in this world. ॥101॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥