पुष्करं च प्रभासं च नैमिषं सागरोदकम्।
देविकामिन्द्रमार्गं च स्वर्णबिन्दुं विगाह्य च॥ ९॥
विबोध्यते विमानस्थ: सोऽप्सरोभिरभिष्टुत:।
अनुवाद
पुष्कर, प्रभास, नैमिषारण्य, सागरोदक (समुद्र का जल), देविका, इन्द्रमार्ग और स्वर्णबिन्दु आदि तीर्थों में स्नान करके मनुष्य विमान द्वारा स्वर्ग की यात्रा करता है और अप्सराएँ उसकी स्तुति गाकर उसे जगाती हैं ॥91/2॥
After bathing in the holy places like Pushkar, Prabhas, Naimisharanya, Sagarodak (sea water), Devika, Indramarga and Swarnbindu, a man travels to heaven in an aeroplane and the Apsaras (celestial nymphs) wake him up by singing his praises. ॥91/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥