श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.27.61 
नन्दीश्वरस्य मूर्तिं तु दृष्ट्वा मुच्येत किल्बिषै:।
स्वर्गमार्गे नर: स्नात्वा ब्रह्मलोकं स गच्छति॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ नन्दीश्वर की मूर्ति का दर्शन करके मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है और स्वर्ग में स्नान करके ब्रह्मलोक को जाता है ॥61॥
 
By seeing the idol of Nandishwar there, a person becomes free from all sins. By taking bath in heaven, he goes to Brahmalok. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)