श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.27.54 
प्रभासे त्वेकरात्रेण अमावास्यां समाहित:।
सिध्यते तु महाबाहो यो नरो जायतेऽमर:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! जो मनुष्य अमावस्या की रात्रि में एकाग्रचित्त होकर प्रभास तीर्थ का दर्शन करता है, वह एक ही रात में सिद्धि प्राप्त कर लेता है और मृत्यु के पश्चात् देवता बन जाता है ॥ 54॥
 
Mahabaho! He who with full concentration visits the Prabhas Tirtha on the new moon night, attains Siddhi in one night and becomes a deity after death. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)