श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.27.26 
महापुर उपस्पृश्य त्रिरात्रोपोषित: शुचि:।
त्रसानां स्थावराणां च द्विपदानां भयं त्यजेत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महापुर तीर्थ में स्नान करके तीन रात्रि तक पवित्रतापूर्वक उपवास करने से मनुष्य को जड़-चेतन प्राणियों के साथ-साथ मनुष्यों का भी भय दूर हो जाता है॥ 26॥
 
By bathing in the Mahapur Tirtha and fasting with purity for three nights, a person gets rid of the fear of animate and inanimate creatures as well as human beings.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)