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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 21
श्लोक
13.27.21
देविकायामुपस्पृश्य तथा सुन्दरिकाह्रदे।
अश्विन्यां रूपवर्चस्कं प्रेत्य वै लभते नर:॥ २१॥
अनुवाद
देविका, सुन्दरिका कुण्ड और अश्विनी तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य मृत्यु के बाद अगले जन्म में सुन्दरता और तेज को प्राप्त करता है । 21॥
After taking bath in Devika, Sundarika Kund and Ashwini Teertha, a person attains beauty and glory in the next birth after death. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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