श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 27: विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  13.27.19-20 
कन्याकूप उपस्पृश्य बलाकायां कृतोदक:॥ १९॥
देवेषु लभते कीर्तिं यशसा च विराजते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कन्याकूप में स्नान करता है और बलका तीर्थ में तर्पण करता है, वह देवताओं में यश पाता है और अपने यश से प्रकाशित होता है ॥19-20॥
 
The man who bathes in Kanyakupa and offers offerings at Balaka Tirtha gets fame among the gods and is illuminated by his fame. 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)