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mahabharat 13.26.10: जो पापी, मूर्ख मनुष्य बिना किसी कारण के ब्राह्मणों को हृदय विदारक दुःख पहुँचाता है, वह ब्रह्महत्यारा कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.26: ब्रह्महत्याके समान पापोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.26.10 
अधर्मनिरतो मूढो मथ्या यो वै द्विजातिषु।
दद्यान्मर्मातिगं शोकं तं विद्याद् ब्रह्मघातिनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो पापी, मूर्ख मनुष्य बिना किसी कारण के ब्राह्मणों को हृदय विदारक दुःख पहुँचाता है, वह ब्रह्महत्यारा कहलाता है।
 
That sinful foolish man who causes heart-rending grief to Brahmins without any reason is known as a killer of Brahman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)