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mahabharat 13.25.d8-d9h: जो देने का वचन देते हैं, परन्तु देते नहीं, जो गरीबों, विनम्र श्रोताओं और क्षमाशीलों की निन्दा करते हैं, वे भी अवश्य ही नरक में जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक d8-d9h
 
 
श्लोक  13.25.d8-d9h 
(संश्रुत्य चाप्रदातारो दरिद्राणां विनिन्दका:।
श्रोत्रियाणां विनीतानां दरिद्राणां विशेषत:॥
क्षमिणां निन्दकाश्चैव ते वै निरयगामिन:।)
 
 
अनुवाद
जो देने का वचन देते हैं, परन्तु देते नहीं, जो गरीबों, विनम्र श्रोताओं और क्षमाशीलों की निन्दा करते हैं, वे भी अवश्य ही नरक में जाते हैं।
 
Those who promise to give but do not give, who criticise the poor, the humble listeners and the forgiving, they too certainly go to hell.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)