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mahabharat 13.25.d6: जो लोग अपने माता-पिता की सुरक्षा, पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण तथा बड़ी बीमारियों से मुक्ति के लिए धन चाहते हैं, उन्हें दान करना अत्यंत फलदायी होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  13.25.d6 
पित्रोश्च रक्षणार्थाय पुत्रदारार्थमेव वा।
महाव्याधिविमोक्षाय तेषु दत्तं महाफलम्॥
 
 
अनुवाद
जो लोग अपने माता-पिता की सुरक्षा, पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण तथा बड़ी बीमारियों से मुक्ति के लिए धन चाहते हैं, उन्हें दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
 
Donation to those who want money for the protection of their parents, for the maintenance of their wife and children and for getting rid of major diseases, is highly fruitful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)