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mahabharat 13.25.d5: व्रत, गुरुदक्षिणा, यज्ञदक्षिणा और विवाह के लिए धन की इच्छा रखने वाले विद्वानों को किया गया दान अत्यंत फलदायी होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.d5 
(व्रतानां पारणार्थाय गुर्वर्थे यज्ञदक्षिणाम्।
निवेशार्थं च विद्वांसस्तेषां दत्तं महाफलम्॥
 
 
अनुवाद
व्रत, गुरुदक्षिणा, यज्ञदक्षिणा और विवाह के लिए धन की इच्छा रखने वाले विद्वानों को किया गया दान अत्यंत फलदायी होता है।
 
Donations made to learned men who desire money for the completion of fasts, Gurudakshina, Yajnadakshina and marriage, are extremely fruitful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)