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mahabharat 13.25.d3: मध्याह्न के बाद के तीन मुहूर्तों को मध्याह्न कहते हैं। दिन का यह चौथा भाग पितृ कार्य के लिए उपयोगी होता है। इसके बाद के तीन मुहूर्तों को संध्या कहते हैं। विद्वानों ने इसे दिन और रात के बीच का समय माना है।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.d3 
चतुर्थमपराह्णं तु त्रिमुहूर्तं तु पित्र्यकम्।
सायाह्नस्त्रिमुहूर्तं च मध्यमं कविभि: स्मृतम्॥ )
 
 
अनुवाद
मध्याह्न के बाद के तीन मुहूर्तों को मध्याह्न कहते हैं। दिन का यह चौथा भाग पितृ कार्य के लिए उपयोगी होता है। इसके बाद के तीन मुहूर्तों को संध्या कहते हैं। विद्वानों ने इसे दिन और रात के बीच का समय माना है।
 
The three muhurats after midday are called afternoon. This fourth part of the day is useful for Pitra Karya. The three muhurats after that are called evening. Scholars have considered this to be the time between day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)