श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  13.25.94 
आढॺाश्च बलवन्तश्च यौवनस्थाश्च भारत।
ये वै जितेन्द्रिया धीरास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जो धैर्यवान पुरुष धनवान, बलवान और युवा होते हुए भी अपनी इन्द्रियों को वश में रखते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं॥94॥
 
O Bharata! Those patient men who, despite being rich, strong and young, keep their senses under control, go to heaven. ॥ 94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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