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mahabharat 13.25.86: जो लोग भक्ति और तप से वेदों का अध्ययन करके प्रतिग्रह में आसक्त नहीं होते, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  13.25.86 
शुश्रूषाभिस्तपोभिश्च विद्यामादाय भारत।
ये प्रतिग्रहनि:स्नेहास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
जो लोग भक्ति और तप से वेदों का अध्ययन करके प्रतिग्रह में आसक्त नहीं होते, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥86॥
 
India Those who do not get attached to Pratigrah after studying the Vedas with devotion and penance, they go to heaven. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)