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mahabharat 13.25.85: जो मनुष्य दान, तप और सत्य से धर्म का आचरण करते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥ 85॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  13.25.85 
दानेन तपसा चैव सत्येन च युधिष्ठिर।
ये धर्ममनुवर्तन्ते ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दान, तप और सत्य से धर्म का आचरण करते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥ 85॥
 
Those men who perform Dharma with charity, austerity and truth go to heaven. ॥ 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)