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mahabharat 13.25.84: हे भरतपुत्र! यदि देवताओं की पूजा वाले किसी भी कार्य में ब्राह्मण का अपमान किया जाता है, तो वह अपमान करने वाले के सभी पुत्रों और पशुओं का नाश कर देता है।   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.84 
सर्वेष्वेव तु कार्येषु दैवपूर्वेषु भारत।
हन्ति पुत्रान् पशून् कृत्स्नान् ब्राह्मणातिक्रम: कृत:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! यदि देवताओं की पूजा वाले किसी भी कार्य में ब्राह्मण का अपमान किया जाता है, तो वह अपमान करने वाले के सभी पुत्रों और पशुओं का नाश कर देता है।
 
O son of Bharata! If a Brahmin is insulted in any of the activities in which the gods are worshipped first, then he destroys all the sons and animals of the one who insults him. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)