Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.69: जो मनुष्य किसी का न्याय करने में समर्थ नहीं हैं और जो दूत का कार्य करते हैं, जो सदैव प्राणियों की हिंसा में प्रवृत्त रहते हैं, वे अवश्य ही नरक में पड़ते हैं। 69. | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूतसंव्यवहाराश्च निष्परीक्षाश्च मानवा:।
प्राणिहिंसाप्रवृत्ताश्च ते वै निरयगामिन:॥ ६९॥
अनुवाद
जो मनुष्य किसी का न्याय करने में समर्थ नहीं हैं और जो दूत का कार्य करते हैं, जो सदैव प्राणियों की हिंसा में प्रवृत्त रहते हैं, वे अवश्य ही नरक में पड़ते हैं। 69.
Those who are not capable of judging a human being and act as messengers, who are always inclined towards violence against living beings, they certainly fall into hell. 69.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥