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श्लोक 13.25.62  |
ये परस्वापहर्तार: परस्वानां च नाशका:।
सूचकाश्च परेषां ये ते वै निरयगामिन:॥ ६२॥ |
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| अनुवाद |
| जो लोग दूसरों का धन हड़पते और नष्ट करते हैं तथा दूसरों की चुगली करते हैं, वे अवश्य नरक में गिरेंगे। 62. |
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| Those who usurp and destroy the wealth of others and backbite others will certainly fall into hell. 62. |
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