श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.25.61 
परदाराभिहर्तार: परदाराभिमर्शिन:।
परदारप्रयोक्तारस्ते वै निरयगामिन:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग दूसरों की स्त्रियों को चुराते हैं, दूसरों की स्त्रियों का सतीत्व नष्ट करते हैं तथा अन्य स्त्रियों को अन्य लोगों से मिलाने के लिए दूत का काम करते हैं, वे अवश्य ही नरक में जाते हैं। 61.
 
Those who steal other's wives, destroy the chastity of another's wife, and act as messengers to unite other women with other people, certainly go to hell. 61.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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