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mahabharat 13.25.60: युधिष्ठिर! जो लोग गुरु के हित के लिए तथा दूसरों को भय से मुक्त करने के लिए बोलने का अवसर न मिलने पर भी झूठ बोलते हैं, वे अवश्य ही नरक में जाते हैं ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.25.60 
गुर्वर्थमभयार्थं वा वर्जयित्वा युधिष्ठिर।
येऽनृतं कथयन्ति स्म ते वै निरयगामिन:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो लोग गुरु के हित के लिए तथा दूसरों को भय से मुक्त करने के लिए बोलने का अवसर न मिलने पर भी झूठ बोलते हैं, वे अवश्य ही नरक में जाते हैं ॥60॥
 
Yudhisthira! People who tell lies except when they have the opportunity to speak for the good of the Guru and to free others from fear, are definitely going to hell. 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)