श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.25.54 
हृतस्वा हृतदाराश्च ये विप्रा देशसम्प्लवे।
अर्थार्थमभिगच्छन्ति तेभ्यो दत्तं महाफलम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
देश में क्रान्ति के समय यदि वे ब्राह्मण जिनके धन और स्त्रियाँ हर ली गई हों, धन मांगने आएँ, तो उन्हें दिया गया दान महान फल देता है ॥ 54॥
 
At the time of a revolution in the country, if those Brahmins whose wealth and women have been taken away come begging for money, then the donation given to them yields great results. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)