Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.25.51: हे मनुष्यों के स्वामी! जो पुण्य के भक्त हैं, जिनके घर में पुण्य का पालन होता है, जिनमें पुण्य का बल है और जो पुण्य के आश्रय में हैं, वे यदि आवश्यकता पड़ने पर भिक्षा मांगते हैं, तो उन्हें दिया गया दान महान फल देता है ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.25.51 
तद्भक्तास्तद्‍गृहा राजंस्तद्‍बलास्तदपाश्रया:।
अर्थिनश्च भवन्त्यर्थे तेषु दत्तं महाफलम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो पुण्य के भक्त हैं, जिनके घर में पुण्य का पालन होता है, जिनमें पुण्य का बल है और जो पुण्य के आश्रय में हैं, वे यदि आवश्यकता पड़ने पर भिक्षा मांगते हैं, तो उन्हें दिया गया दान महान फल देता है ॥ 51॥
 
O Lord of men! Those who are devotees of virtue, in whose homes virtue is followed, who have the strength of virtue and who have taken refuge in virtue, if they beg in times of need, then the donation given to them yields great results. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)