Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.25.50: राजन! जो पुण्यात्मा हैं, जिनकी जीविका के साधन नष्ट हो गए हैं और जो अन्न के अभाव से अत्यन्त दुर्बल हो गए हैं, यदि वे भिखारी बनकर दानकर्ता के पास आते हैं, तो उन्हें दिया गया दान महान फल देता है ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.25.50 
चारित्रनिरता राजन् ये कृशा: कृशवृत्तय:।
अर्थिनश्चोपगच्छन्ति तेषु दत्तं महाफलम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो पुण्यात्मा हैं, जिनकी जीविका के साधन नष्ट हो गए हैं और जो अन्न के अभाव से अत्यन्त दुर्बल हो गए हैं, यदि वे भिखारी बनकर दानकर्ता के पास आते हैं, तो उन्हें दिया गया दान महान फल देता है ॥50॥
 
King! If those who are virtuous and whose means of livelihood have been destroyed and who have become very weak due to lack of food come to the donor as beggars, then the donation given to them brings great results. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)