अवघुष्टं च यद् भुक्तमव्रतेन च भारत।
परामृष्टं शुना चैव तं भागं रक्षसां विदु:॥ ५॥
अनुवाद
हे भरतनन्दन! जो अन्न लोगों में घोषित किया गया है, जिसे व्रत न करने वाले मनुष्य ने खाया है अथवा जिसे कुत्ते ने छुआ है, वह भी राक्षसों का भाग माना गया है॥5॥
O Bharatanandan! The food which has been announced among the people, which has been eaten by a person who has not observed fast or which has been touched by a dog is also considered to be the share of the demons. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥