श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.25.39 
जातकर्मादिका: सर्वास्त्रिषु वर्णेषु भारत।
ब्रह्मक्षत्रे हि मन्त्रोक्ता वैश्यस्य च युधिष्ठिर॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
भरतवंशी युधिष्ठिर! जातकर्म आदि सभी संस्कार तीनों वर्णों में विहित हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के सभी संस्कार वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ सम्पन्न किए जाने चाहिए। 39.
 
Bharatvanshi Yudhishthira! All the rites like Jaatkarma etc. are prescribed in all the three castes. All the rites of Brahmin, Kshatriya and Vaishya should be performed with the recitation of Vedic mantras. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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