श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.25.38 
वैश्यस्य दैवे वक्तव्यं प्रीयन्तां देवता इति।
कर्मणामानुपूर्व्येण विधिपूर्वं कृतं शृणु॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वैश्य के घर देवकर्म में ‘प्रियन्ता देवता:’ इस वाक्य का जप करना चाहिए। अब क्रमशः तीनों वर्णों के कर्मकाण्ड सुनो। 38॥
 
This sentence ‘Priyanta Devta:’ should be chanted in the Devkarma at Vaishya’s house. Now listen to the rituals of the three varnas respectively. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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