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श्लोक 13.25.38  |
वैश्यस्य दैवे वक्तव्यं प्रीयन्तां देवता इति।
कर्मणामानुपूर्व्येण विधिपूर्वं कृतं शृणु॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| वैश्य के घर देवकर्म में ‘प्रियन्ता देवता:’ इस वाक्य का जप करना चाहिए। अब क्रमशः तीनों वर्णों के कर्मकाण्ड सुनो। 38॥ |
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| This sentence ‘Priyanta Devta:’ should be chanted in the Devkarma at Vaishya’s house. Now listen to the rituals of the three varnas respectively. 38॥ |
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