श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.25.36 
अपवर्गे तु वैश्यस्य श्राद्धकर्मणि भारत।
अक्षय्यमभिधातव्यं स्वस्ति शूद्रस्य भारत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वैश्य के घर श्राद्ध के अन्त में 'अक्षयमस्तु' (श्राद्ध का दान अक्षय हो) कहना उचित है और शूद्र के घर श्राद्ध के अन्त में 'स्वस्ति' (समृद्धि हो) कहना उचित है। 36॥
 
India At the end of Shraddha in the house of a Vaishya, it is appropriate to say 'Akshayamastu' (may the donations of Shraddha be inexhaustible) and at the end of the Shraddha of a Shudra, it is appropriate to pronounce the sentence 'Swasti' (may there be prosperity). 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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