श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.25.35 
श्राद्धापवर्गे विप्रस्य स्वधा वै मुदिता भवेत्।
क्षत्रियस्यापि यो ब्रूयात् प्रीयन्तां पितरस्त्विति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण के यहाँ श्राद्ध समाप्त होने पर 'स्वधा सम्पद्यताम्' वाक्य बोलने से पितर प्रसन्न होते हैं। क्षत्रिय के यहाँ श्राद्ध समाप्त होने पर 'पितर: प्रियन्ताम' (पितर संतुष्ट हों) यह वाक्य बोलना चाहिए। 35॥
 
After the completion of Shraddha at the Brahmin's place, the ancestors feel happy when they pronounce the sentence 'Svadha Sampadyatam'. At the end of Shraddha at a Kshatriya's place, this sentence 'Pitar: Priyantaam' (may the ancestors be satisfied) should be pronounced. 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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