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mahabharat 13.25.34: युधिष्ठिर! जिस दिन योग्य ब्राह्मण, दही, घी, अमावस्या तथा जंगली कंद, मूल और फलों का गूदा उपलब्ध हो, वही श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम समय है। 34.   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.25.34 
श्राद्धस्य ब्राह्मण: काल: प्राप्तं दधि घृतं तथा।
सोमक्षयश्च मांसं च यदारण्यं युधिष्ठिर॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जिस दिन योग्य ब्राह्मण, दही, घी, अमावस्या तथा जंगली कंद, मूल और फलों का गूदा उपलब्ध हो, वही श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम समय है। 34.
 
Yudhishthira! The day on which a worthy Brahmin, curd, ghee, the new moon day and wild tubers, roots and pulp of fruits are available is the best time for performing Shraddha. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)