Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.25.28: हे राजन! जो ब्राह्मण ऊपर उठता है और फिर तुरन्त नीचे गिर जाता है तथा नीचे गिरकर भी ऊपर उठता है तथा किसी जीव की हत्या नहीं करता, चाहे वह किंचित भी दोषी क्यों न हो, उसे श्राद्धकर्म में आमंत्रित करना उचित है। | mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उदितास्तमितो यश्च तथैवास्तमितोदित:।
अहिंस्रश्चाल्पदोषश्च स राजन् केतनक्षम:॥ २८॥
अनुवाद
हे राजन! जो ब्राह्मण ऊपर उठता है और फिर तुरन्त नीचे गिर जाता है तथा नीचे गिरकर भी ऊपर उठता है तथा किसी जीव की हत्या नहीं करता, चाहे वह किंचित भी दोषी क्यों न हो, उसे श्राद्धकर्म में आमंत्रित करना उचित है।
O King! A Brahmin who rises high and then immediately falls low and rises high after falling low and does not kill any living being, even if he is slightly guilty, it is appropriate to invite him to a Shraddha ceremony. 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥