श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.25.20 
अपरिज्ञातपूर्वाश्च गणपूर्वाश्च भारत।
पुत्रिकापूर्वपुत्राश्च श्राद्धे नार्हन्ति केतनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भरत! जिन ब्राह्मणों के विषय में पहले से कुछ ज्ञात नहीं है, जो ग्राम के मुखिया हैं और जो पुत्रिका-धर्मानुसार विवाहित स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं और अपने नाना के घर में रहते हैं, ऐसे ब्राह्मण भी श्राद्धकर्म में आमंत्रित करने के अधिकारी नहीं हैं॥ 20॥
 
Bharata! Those Brahmins about whom nothing is known beforehand, who are the village leaders and who are born from the womb of a woman married according to the Putrika*-dharma and live in the house of her maternal grandfather, such Brahmins are also not entitled to be invited to the Shraddha ceremony.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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