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mahabharat 13.25.19: हे मनुष्यों के स्वामी! जो ब्राह्मण अग्निहोत्र नहीं करते, जो शव ढोते हैं, जो चोरी करते हैं और जो पाप के कारण पतित हो गए हैं, वे भी श्राद्ध में बुलाने योग्य नहीं हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.25.19 
अनग्नयश्च ये विप्रा मृतनिर्यातकाश्च ये।
स्तेनाश्च पतिताश्चैव राजन् नार्हन्ति केतनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो ब्राह्मण अग्निहोत्र नहीं करते, जो शव ढोते हैं, जो चोरी करते हैं और जो पाप के कारण पतित हो गए हैं, वे भी श्राद्ध में बुलाने योग्य नहीं हैं॥19॥
 
O Lord of men! Those Brahmins who do not perform Agnihotra, those who carry corpses, those who steal and those who have become degraded due to their sins are also not worthy of being invited for the Shraddha.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)