श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 25: देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देने योग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  13.25.101 
रसानां चाथ बीजानां धान्यानां च युधिष्ठिर।
स्वयमुत्पाद्य दातार: पुरुषा: स्वर्गगामिन:॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो लोग स्वयं रस, बीज और अन्न उत्पन्न करते हैं तथा दान करते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं॥101॥
 
Yudhishthira! Those who themselves produce and donate the juice, seeds and grains, go to heaven.॥ 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)