युधिष्ठिर उवाच
श्राद्धकाले च दैवे च पित्र्येऽपि च पितामह।
इच्छामीह त्वयाऽऽख्यातं विहितं यत् सुरर्षिभि:॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! मैं आपसे देवताओं और पितरों के लिए श्राद्धकर्म में देवताओं और ऋषियों द्वारा बताई गई विधि का वर्णन सुनना चाहता हूँ॥ 1॥
Yudhishthira asked - Grandfather! I wish to hear from you the description of the rituals prescribed by the gods and the sages during the Shraddha ceremony for the gods and ancestors.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥