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mahabharat 13.24.31: अग्निहोत्र का कभी त्याग न करो। वेदों का स्वाध्याय न छोड़ो और ब्राह्मणों की निन्दा न करो; क्योंकि ये तीनों दोष ब्रह्महत्या के समान हैं। 31॥   |   mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.24.31 
नाग्निं परित्यजेज्जातु न च वेदान् परित्यजेत्।
न च ब्राह्मणमाक्रोशेत् समं तद् ब्रह्महत्यया॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अग्निहोत्र का कभी त्याग न करो। वेदों का स्वाध्याय न छोड़ो और ब्राह्मणों की निन्दा न करो; क्योंकि ये तीनों दोष ब्रह्महत्या के समान हैं। 31॥
 
Never abandon Agnihotra. Do not give up self-study of the Vedas and do not criticize Brahmins; Because these three faults are equivalent to Brahmahatya. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)