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mahabharat 13.24.28: ब्राह्मणों का आदर करो। बड़ों की सेवा और पूजा में लगे रहो। सभी जीवों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करो। नम्र बनो और सबसे मधुर वचन बोलो।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.24.28 
ब्राह्मणांश्चैव मन्येत गुरूंश्चाप्यभिपूजयेत्।
सर्वभूतानुलोमश्च मृदुशील: प्रियंवद:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों का आदर करो। बड़ों की सेवा और पूजा में लगे रहो। सभी जीवों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करो। नम्र बनो और सबसे मधुर वचन बोलो।॥28॥
 
Respect the brahmins. Engage in the service and worship of the elders. Be friendly with all living beings. Be humble and speak the sweetest words to everyone.॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)