श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.24.18 
युधिष्ठिर उवाच
अनेकान्तं बहुद्वारं धर्ममाहुर्मनीषिण:।
किंनिमित्तं भवेदत्र तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! विद्वान लोग कहते हैं कि धर्म के साधन और फल अनेक प्रकार के होते हैं। मनुष्य के कौन-से गुण उसे दान देने योग्य बनाते हैं? कृपया मुझे यह बताइए॥ 18॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! Scholars say that the means and results of Dharma are of many types. Which qualities of a person are responsible for his being worthy of giving charity? Please tell me this.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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