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mahabharat 13.24.10: कुन्तीनन्दन! पृथ्वी, कश्यप, अग्नि और मार्कण्डेय - इन चार तेजस्वी पुरुषों से इस विषय में मेरी बात मत सुनो। 10॥   |   mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.24.10 
तत्रेमं शृणु मे पार्थ चतुर्णां तेजसां मतम्।
पृथिव्या: काश्यपस्याग्नेर्मार्कण्डेयस्य चैव हि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! पृथ्वी, कश्यप, अग्नि और मार्कण्डेय - इन चार तेजस्वी पुरुषों से इस विषय में मेरी बात मत सुनो। 10॥
 
Kuntinandan! Don't listen to me about this matter from these four brilliant persons - Prithvi, Kashyap, Agni and Markandeya. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)