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mahabharat 13.24.1: युधिष्ठिर ने पूछा - भरतश्रेष्ठ! प्राचीन ब्राह्मण दान देने में श्रेष्ठ किसे मानते हैं? दण्ड-कमण्डल आदि चिन्ह धारण करने वाले ब्रह्मचारी ब्राह्मण को या चिन्ह रहित गृहस्थ ब्राह्मण को?   |   mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.24.1 
युधिष्ठिर उवाच
किमाहुर्भरतश्रेष्ठ पात्रं विप्रा: सनातना:।
ब्राह्मणं लिङ्गिनं चैव ब्राह्मणं वाप्यलिङ्गिनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - भरतश्रेष्ठ! प्राचीन ब्राह्मण दान देने में श्रेष्ठ किसे मानते हैं? दण्ड-कमण्डल आदि चिन्ह धारण करने वाले ब्रह्मचारी ब्राह्मण को या चिन्ह रहित गृहस्थ ब्राह्मण को?
 
Yudhishthir asked – Bharatshreshtha! Whom do the ancient Brahmins consider to be the best recipient of donations? To the celibate Brahmin who wears the marks like Danda-Kamandalu etc. or to the householder Brahmin without any mark? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)