Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.23.d7: सत्ययुग में धर्म का आचरण सुगम है। उस युग के अंत में धर्म का स्वरूप मनुष्यों की मोह-माया से आवृत हो जाता है; अतः प्रत्येक युग में धर्म का स्वरूप क्या है? मैं आप सभी महर्षियों से यह जानना चाहता हूँ। | mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्ययुग में धर्म का आचरण सुगम है। उस युग के अंत में धर्म का स्वरूप मनुष्यों की मोह-माया से आवृत हो जाता है; अतः प्रत्येक युग में धर्म का स्वरूप क्या है? मैं आप सभी महर्षियों से यह जानना चाहता हूँ।
In Satya Yuga, the practice of Dharma is easy. After the end of that Yuga, the nature of Dharma becomes covered by the delusion of humans; therefore, what is the nature of Dharma in each Yuga? I want to know this from all you great sages.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥