Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.23.d41: मार्कण्डेय ने पूछा- कभी-कभी धर्म के अधिकारी लोगों के मन में धर्म के प्रति संशय उत्पन्न हो जाता है। ऐसा क्या किया जाए कि उनके धार्मिक आचरण में बाधा न आए? मैं यह जानना चाहता हूँ। | mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय उवाच
धर्मेष्वधिकृतानां तु नराणां मुह्यते मन:।
कथं न विघ्नं भवति एतदिच्छामि वेदितुम्॥
अनुवाद
मार्कण्डेय ने पूछा- कभी-कभी धर्म के अधिकारी लोगों के मन में धर्म के प्रति संशय उत्पन्न हो जाता है। ऐसा क्या किया जाए कि उनके धार्मिक आचरण में बाधा न आए? मैं यह जानना चाहता हूँ।
Markandeya asked- Sometimes the minds of those who are entitled to religion become doubtful about religion. What should be done so that their religious conduct is not hindered? I want to know this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥