Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.23.d39: नारदजी बोले - बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि मनुष्यों के हाथ में पाँच तीर्थ होते हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं - देवतीर्थ, ऋषितीर्थ, पितृतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ और वैष्णवीतीर्थ। (अंगुलियों के अग्रभाग में देवतीर्थ होता है। कनिष्ठिका और अनामिका के मूल में अर्शतीर्थ होता है। इसे कायतीर्थ और प्रजापत्यतीर्थ भी कहते हैं। अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग में पितृतीर्थ होता है। अंगूठे के मूल भाग में ब्रह्मतीर्थ और हथेली के मध्य भाग में वैष्णवीतीर्थ होता है।)॥ | mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारदजी बोले - बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि मनुष्यों के हाथ में पाँच तीर्थ होते हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं - देवतीर्थ, ऋषितीर्थ, पितृतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ और वैष्णवीतीर्थ। (अंगुलियों के अग्रभाग में देवतीर्थ होता है। कनिष्ठिका और अनामिका के मूल में अर्शतीर्थ होता है। इसे कायतीर्थ और प्रजापत्यतीर्थ भी कहते हैं। अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग में पितृतीर्थ होता है। अंगूठे के मूल भाग में ब्रह्मतीर्थ और हथेली के मध्य भाग में वैष्णवीतीर्थ होता है।)॥
Naradji said – Wise men say that there are five places of pilgrimage in the hands of human beings. Their names are as follows – Devtirtha, Rishitirtha, Pitritirtha, Brahmatirtha and Vaishnavitirtha. (There is Devtirtha in the tip of the fingers. There is Arshtirtha in the root of the little finger and ring finger. This is also called Kayatitirtha and Prajapatyatirtha. There is Pitrutirtha in the middle part of the thumb and index finger. There is Brahmatirtha in the root part of the thumb and Vaishnavitirtha in the middle part of the palm.)॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥